अम्बिकापुर/रायपुर। हसदेव अरण्य क्षेत्र में प्रस्तावित केते एक्सटेंशन कोल परियोजना को मिली स्वीकृति को लेकर पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने केंद्र और राज्य सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जनहित और पर्यावरणीय संतुलन की अनदेखी कर निजी कंपनी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से परियोजना को मंजूरी दी गई है।
👉7 लाख पेड़ों की कटाई से वन क्षेत्र होगा प्रभावित: सिंहदेव

सिंहदेव ने कहा कि राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम को आवंटित इस परियोजना में अडानी समूह एमडीओ (माइन डेवलपर एंड ऑपरेटर) की भूमिका में है। परियोजना का लगभग 99 प्रतिशत हिस्सा हसदेव अरण्य के संरक्षित एवं आरक्षित घने वन क्षेत्र में आता है। इसके तहत करीब 1,742.6 हेक्टेयर वन भूमि प्रभावित होगी और लगभग 7 लाख पेड़ों की कटाई की आशंका है।
👉रामगढ़ पहाड़ के अस्तित्व पर संकट
उन्होंने कहा कि यह पूरा इलाका सरगुजा के ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व वाले रामगढ़ पहाड़ से लगा हुआ है। पहले से संचालित कोयला परियोजनाओं के कारण रामगढ़ पहाड़ में दरारें पड़ने और चट्टानों के टूटने की घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में नई खदान की स्वीकृति से स्थिति और गंभीर हो सकती है तथा रामगढ़ पहाड़ के अस्तित्व पर संकट गहरा सकता है।
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि 26 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा गया था, जिसमें हसदेव अरण्य क्षेत्र में नई कोल परियोजनाओं को अनुमति नहीं देने की बात कही गई थी। इसके अलावा जुलाई 2023 में सुप्रीम कोर्ट में दायर शपथ पत्र में भी राज्य सरकार की ओर से नई खदानों को गैरजरूरी बताया गया था।
👉पर्यावरण संरक्षण और आदिवासी हितों की उपेक्षा निजी कंपनी के हित में काम कर रही सरकार
सिंहदेव ने कहा कि इसके बावजूद केते एक्सटेंशन परियोजना को स्वीकृति देना सरकार की कथनी और करनी में अंतर को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार पर्यावरण संरक्षण और आदिवासी हितों की उपेक्षा कर एक निजी कंपनी के हित में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि वे लगातार इस परियोजना का विरोध करते रहे हैं और पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने भी संवैधानिक दायरे में रहते हुए हसदेव अरण्य को बचाने के प्रयास किए थे।
