राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के डोंगरगांव स्थित बीजाभांठा शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल में मंगलवार को मधुमक्खियों के अचानक हुए हमले से बड़ा हादसा टल गया। पहली कक्षा के दौरान स्कूल भवन के छज्जे पर बने मधुमक्खियों के छत्ते से निकले झुंड ने क्लासरूम पर हमला कर दिया, जिससे पूरे स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। इस घटना में कुल 72 छात्र-छात्राएं प्रभावित हुए। इनमें से 32 विद्यार्थियों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डोंगरगांव में भर्ती कराया गया, जबकि 40 बच्चों का स्कूल परिसर में ही प्राथमिक उपचार किया गया।

घटना के दौरान कक्षा शिक्षिका कनक मंडावी ने अद्भुत साहस और सूझबूझ का परिचय दिया। खुद मधुमक्खियों के डंक का शिकार होने के बावजूद उन्होंने अंतिम छात्र के सुरक्षित बाहर निकलने तक कक्षा नहीं छोड़ी और सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफल रहीं।
मधुमक्खियों के हमले में गंभीर रूप से प्रभावित विमला (कक्षा 10वीं), भनेश्वरी (कक्षा 12वीं) और नम्रता (कक्षा 11वीं) को सांस लेने में तकलीफ होने पर ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया। समय पर इलाज मिलने से तीनों की हालत में सुधार हुआ और अब सभी विद्यार्थी खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं।
सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम तीन एंबुलेंस के साथ स्कूल पहुंची। डोंगरगांव और अर्जुनी से चिकित्सकों तथा स्वास्थ्यकर्मियों को भी मौके पर भेजा गया। बीएमओ डॉ. रागिनी चंद्रे ने बताया कि मधुमक्खियों के डंक से बच्चे घबरा गए थे और कई को दर्द व बेचैनी की शिकायत थी। त्वरित उपचार के बाद अधिकांश बच्चों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, जबकि एक छात्रा का इलाज देर शाम तक जारी रहा।
बताया जा रहा है कि विद्यालय की नई इमारत के छज्जे पर लंबे समय से मधुमक्खियों का बड़ा छत्ता बना हुआ था। आशंका जताई जा रही है कि किसी पक्षी द्वारा छत्ते को छेड़ने के कारण मधुमक्खियां आक्रामक हो गईं और उन्होंने क्लासरूम पर हमला कर दिया। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब स्कूल भवन पर लंबे समय से मधुमक्खियों का छत्ता मौजूद था, तो उसे पहले क्यों नहीं हटाया गया। यदि यह हमला प्रार्थना सभा या अवकाश के दौरान होता, जब बड़ी संख्या में बच्चे एक साथ मैदान में मौजूद रहते, तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती थी।
स्कूल की प्राचार्य शोभा श्रीवास्तव ने बताया कि घटना के तुरंत बाद मधुमक्खियों का छत्ता हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। साथ ही सुरक्षा के मद्देनजर संबंधित भवन में फिलहाल कक्षाएं संचालित नहीं की जाएंगी।
इस घटना ने स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था और नियमित सुरक्षा ऑडिट की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल परिसरों में भवनों के छज्जों, पेड़ों, बिजली के खंभों और अन्य स्थानों का समय-समय पर निरीक्षण किया जाना चाहिए, ताकि मधुमक्खियों के छत्तों और अन्य संभावित खतरों को समय रहते हटाया जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।
