रायपुर। छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन (JJM) के तहत लंबित भुगतान का मुद्दा अब बड़ा विवाद बनता जा रहा है। राजनांदगांव जिले के छुईखदान क्षेत्र में मिशन से जुड़े एक ठेकेदार गणेश्वर जंघेल की आत्महत्या के बाद निर्माण एजेंसियों में भारी आक्रोश है। एजेंसियों का आरोप है कि लंबे समय से भुगतान नहीं मिलने और बढ़ते कर्ज के कारण ठेकेदारों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो चुकी है।

निर्माण एजेंसियों का दावा है कि ठेकेदार ने आत्महत्या से पहले एक सुसाइड नोट भी छोड़ा था, जिसमें भुगतान नहीं मिलने और कर्ज के दबाव का उल्लेख होने की बात कही जा रही है। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
👉6 जुलाई को नीर भवन घेरने का ऐलान
छत्तीसगढ़ कांट्रैक्टर्स एसोसिएशन ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए 6 जुलाई को रायपुर में नीर भवन और मिशन संचालक कार्यालय के घेराव का ऐलान किया है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष बीरेश शुक्ला का कहना है कि विभाग की ओर से 30 जून तक भुगतान को लेकर निर्णय का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस फैसला नहीं हुआ। उन्होंने चेतावनी दी कि भुगतान नहीं होने तक चरणबद्ध आंदोलन जारी रहेगा।
निर्माण एजेंसियों का कहना है कि जल जीवन मिशन के तहत प्रदेशभर में कई परियोजनाएं भुगतान अटकने की वजह से प्रभावित हैं। सबसे अधिक परेशानी छोटे ठेकेदारों को हो रही है, जो कर्ज के बोझ तले दब चुके हैं।
सूत्रों के अनुसार, इससे पहले भी सूरजपुर और दुर्ग में मिशन से जुड़े ठेकेदारों की आत्महत्या के मामले सामने आने की चर्चा रही है, हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल विभाग की ओर से इस पूरे मामले पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
