बड़ी खबर : सोनम वांगचुक अनशन खत्म करने को तैयार , लेकिन पत्र लिखकर सरकार के सामने रख दी यह बड़ी शर्त …

दिल्ली: शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा पेपर लीक के मुद्दे पर अनिश्चितकालीन अनशन कर रहे सोनम वांगचुक ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह को पत्र लिखकर अपनी शर्तें स्पष्ट कर दी हैं।उन्होंने कहा है कि जब तक सरकार आंदोलन में शामिल युवाओं के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक या प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं करने का स्पष्ट आश्वासन नहीं देती, तब तक वह अपना अनशन समाप्त नहीं करेंगे।

👉सोनम वांगचुक ने सरकार को लिखा पत्र

बुधवार को लिखे पत्र में वांगचुक ने कहा कि अस्पताल में मुलाकात के दौरान दोनों केंद्रीय मंत्रियों ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि सरकार परीक्षा पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा देने और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे सहित जवाबदेही सुनिश्चित करने पर सकारात्मक विचार करेगी।

👉सोनम वांगचुक ने संसद मार्च का किया जिक्र

सोनम वांगचुक ने 20 जुलाई को हुए चलो संसद मार्च का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था, लेकिन पुलिस ने अत्यधिक बल प्रयोग किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि आंदोलन में शामिल छात्रों और युवाओं के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई या उत्पीड़न नहीं किया जाएगा।

👉65 सांसदों ने की अनशन खत्म करने की अपील

पत्र में उन्होंने लिखा कि केंद्रीयp मंत्रियों की मुलाकात के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने उन्हें पत्र लिखकर और व्यक्तिगत रूप से मिलकर अनशन समाप्त करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि वह छात्रों के बीच लौटना और शिक्षा के क्षेत्र में अपना काम जारी रखना चाहते हैं, लेकिन उन युवाओं की कीमत पर नहीं जिनके लिए यह आंदोलन शुरू हुआ।

👉सरकार से मांगा आश्वासन

वांगचुक ने सरकार से स्पष्ट आश्वासन मांगा कि आंदोलन में शामिल किसी भी युवा प्रदर्शनकारी के खिलाफ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं होगी। उनका कहना है कि इन युवाओं का अपराध सिर्फ इतना है कि उन्होंने जवाबदेह और निष्पक्ष शिक्षा व्यवस्था की मांग उठाई।

👉सोनम वांगचुक ने पत्र में बताई अच्छे लोकतंत्र की पहचान

उन्होंने कहा कि यदि सरकार ऐसा आश्वासन देती है तो वह विश्वास के साथ अपना अनशन समाप्त कर देंगे। लेकिन यदि ऐसा नहीं हुआ तो वह अनिश्चितकालीन अनशन जारी रखने को मजबूर होंगे। साथ ही उन्होंने सरकार से आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस बल के इस्तेमाल से बचने की भी अपील की। पत्र के अंत में वांगचुक ने लिखा कि किसी लोकतंत्र की असली पहचान इस बात से होती है कि वह साहस और उम्मीद के साथ अपनी बात रखने वाले युवाओं के साथ कैसा व्यवहार करता है।