CWG 2026: छोटी उम्र में कटा था हाथ,पर नहीं टूटा हौसला ,दिलिप गावित ने जीता 100 मीटर रेस में गोल्ड, आखिरी 30 मीटर में छीनी जीत …

खेल । भारत के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का सातवां दिन सुनहरी सफलता लेकर आया, वो भी एथलेटिक्स ट्रैक से, जहां भारत के गोल्ड जीतने की खबरें कम ही सुनने को मिलती हैं. मगर 23 साल के दिलिप महादु गावित ने ऐसी सफलता देश को दिलाई है.

ग्लासगो में चल रहे गेम्स में पैरा एथलेटिक्स में T47 कैटेगरी में 100 मीटर रेस में भारत के दिलिप महादु गावित ने सबसे तेज रेस लगाते हुए गोल्ड मेडल जीत लिया. वहीं भारत के ही मोहम्मद बेसिल ने इसी रेस में दूसरा स्थान हासिल करते हुए सिल्वर मेडल जीतकर सफलता को और यादगार बना दिया. ये भारत का गेम्स में तीसरा गोल्ड है, जबकि कुल 15वां मेडल है.

ग्लासगो के स्कॉटस्टन स्टेडियम में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में बुधवार 29 जुलाई की रात पैरा एथलेटिक्स का ये फाइनल हुआ. ये T47 कैटेगरी में 100 मीटर का फाइनल था, जिसमें भारत की ओर से 2 दावेदार थे. ऐसा इक्का-दुक्का मौकों पर ही देखने को मिला है, जब किसी स्प्रिंट में एक साथ 2 भारतीय मेडल के लिए दावेदारी पेश कर रहे थे. मगर दोनों ने सिर्फ इस फाइनल में हिस्सा ही नहीं लिया बल्कि एक बेहतरीन रेस के साथ ही गोल्ड और सिल्वर जीतकर देश की स्थिति को बेहतर बना दिया.

👉सिर्फ 30 मीटर में पलटी बाजी, सिल्वर भी भारत के नाम

मगर ये रेस गावित ने एकदम अलग अंदाज में जीती. जैसे ही एयर गन को चलाकर रेस शुरू होने का ऐलान किया तो भारत के मोहम्मद बेसिल और इंग्लैंड के केविन सैंटोस ने बेहतरीन आगाज किया. दोनों शुरू से ही लगातार रेस में आगे चल रहे थे और लग रहा था कि इन दोनों में से ही कोई एक गोल्ड जीतेगा. मगर जैसे ही आखिरी 30 मीटर का फासला बचा था, दिलिप ने अपनी रफ्तार ऐसे बढ़ाई, जैसे वो रॉकेट पर बैठ गए हों.

उन्होंने सीधे पांचवें स्थान से ऐसी रफ्तार भरी कि फिर पहला स्थान हासिल कर ही दम लिया.उन्होंने 10.71 सेकेंड के साथ ये रेस जीती, जो कि कॉमनवेल्थ गेम्स में इस कैटेगरी का नया रिकॉर्ड बन गया. वहीं भारत के बेसिल और इंग्लैंड के सैंटोस के बीच एक लाजवाब फोटो फिनिश हुआ, जिसमें मामूली अंतर से बेसिल ने दूसरा स्थान हासिल करते हुए सिल्वर मेडल जीत लिया.

👉छोटी उम्र में कटा हाथ, पर नहीं मानी हार

महाराष्ट्र के नासिक जिले से आने वाले दिलिप महादु का जन्म 2023 में हुआ था. मगर कुछ ही साल बाद उनका दायां हाथ काटना पड़ा था. वो जब छोटे थे, तब एक बार पेड़ से गिर गए थे, जिसके कारण उनका दायां हाथ काटना पड़ गया था. इसके बाद से ही वो सिर्फ एक हाथ के दम पर अपना जीवन बिता रहे हैं लेकिन इसी दौरान एथलेटिक्स उनके लिए बड़ा सहारा बनकर उभरा. स्थानीय कोच की निगरानी में गावित ने स्प्रिंटिंग का तौर-तरीका सीखा. 2019 में वो खेलो इंडिया गेम्स में महाराष्ट्र की टीम का हिस्सा थे.

दिलिप के जीवन की सबसे बड़ी सफलता आई 2023 के हांगझू पैरा-एशियन गेम्स में. यहां उन्होंने T47 कैटेगरी में ही 400 मीटर रेस का गोल्ड मेडल जीतकर सबको चौंका दिया. हालांकि इसके बाद उन्होंने अपनी रेसिंग को बदला और 400 मीटर के बजाए 100 मीटर में अपना हाथ आजमया. ये फैसला आखिरकार सही साबित हुआ और अब उन्होंने एशियन गेम्स के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स में भी गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है.