CG : बच्चों की नईया पार लगाने 3 किमी दुर्गम रास्ते ,उफनती नदी पार करती हैं ये महिला शिक्षक ,कलेक्टर ने भी जज्बे को किया सलाम ..

बलरामपुर। मानसून के मौसम में छत्तीसगढ़ के बलरामपुर में हर दिन 2 स्कूल टीचर ऐसा सफर तय करती हैं, जिसे देखकर आप नामुमकिन कहेंगे। लेकिन वाड्रफनगर ब्लॉक एक कोने में बने अपने स्कूल के लिए दो महिला शिक्षक हर दिन ऐसा जतन करती हैं। इसके बाद वह स्कूल पहुंचती हैं। बारिश के दिनों में स्कूल का संपर्क बाकी दुनिया से कट जाता है।

👉नदियों के संगम पर बसा है गांव

दरअसल, बलरामपुर जिले का धौरपुर गांव मोरन और झरिया दो नदियों के संगम पर बसा है। मॉनसून में यहां सिर्फ पैदल ही पहुंचा जा सकता है और वही लोग पहुंच पाते हैं, जो नदी पार करने का जोखिम उठाते हैं। टीचर संध्या हलदर और कर्मिला टोप्पो के लिए यह जोखिम उनके काम का ही एक हिस्सा है। टोप्पो अपनी नौ महीने की बेटी को गोद में लेकर पानी पार करती हैं, पानी कभी कमर तक तो कभी पेट तक ऊंचा होता है।

👉दुर्गम रास्ते और नदी पारकर जाती हैं स्कूल

दोनों लेडी टीचर के दिन की शुरुआत ऐसे ही होती है। अपनी स्कूटी दोनों मारना में पार्क करती हैं क्योंकि गाड़ी यही तक आती है। इसके बाद तीन किमी पथरीले और पहाड़ी रास्ते पर पैदल निकल पड़ती हैं। इसके बाद वह नदी आती है।

👉3 किमी चलते हैं पैदल

संध्या हलदर ने बताया कि हम स्कूटी को मारना में पार्क करते हैं। रास्ता पूरी तरह से पहाड़ी है। इसके बाद तीन किमी पैदल चलते हैं। नदी पार करते और स्कूल पहुंचते हैं।
नदी पार कर पाना हमेशा पक्का नहीं होता है। जिन दिनों पानी का लेवल कम होता है, हम पार कर लेते हैं। लेकिन जब पानी बहुत ज्यादा होता है तो हमें नदी से ही वापस लौटना पड़ता है।

संध्या हलदर, महिला शिक्षक

👉मेहनत सार्थक हो जाती है

उन्होंने कहा कि रास्ते भले ही मुश्किल हो, लेकिन जिन बच्चों को वे पढ़ाती हैं, उनकी खुशी इस मेहनत को सार्थक बना देती है। उन्होंने कहा कि बच्चे बहुत छोटे हैं। हमें उनकी बहुत चिंता होती है और बुरा लगता है कि हम उन तक नहीं पहुंच पाते या उन्हें शिक्षा नहीं दे पाते। जब बच्चे हमें देखते हैं तो बहुत खुश हो जाते हैं।

👉2014 से कर्मिला टोप्पो की तैनाती

कर्मिला टोप्पो की इस स्कूल में 2014 से तैनाती है। उन्होंने बताया कि कई लोगों ने उन्हें इस रास्ते से न जाने की सलाह दी है। अपनी बच्ची को गोद में लिए उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम में हर साल ऐसा ही होता है। हमें सलाह दी जाती है कि ऐसा न करें और अगर पानी का लेवल ज्यादा हो तो न जाएं।

👉कलेक्टर ने की तारीफ

बलरामपुर कलेक्टर संजय त्रिपाठी ने को जब दोनों शिक्षिकाओं के बारे में पता चला तो उन्होंने कहा कि छोटे बच्चे को साथ लेकर वह नदी पार करती हैं और तीन किमी पैदल चलकर स्कूल पहुंचती हैं।

👉मिसाल कायम की

कलेक्टर ने कहा कि अपनी अटूट निष्ठा और कड़ी मेहनत से उन्होंने जिले के दूसरे शिक्षकों के लिए सचमुच तारीफ के काबिल मिसाल कायम की है। मैं उन शिक्षकों का बहुत सम्मान करती हूं जो अपने काम के प्रति इतने समर्पित हैं। ऐसे शिक्षक वाकई बहुत कम मिलते हैं।