दिल्ली । राजधानी दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर रविवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। दिल्ली पुलिस ने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) की पीएचडी स्कॉलर नेहा बोरा को हिरासत में ले लिया है।

यह विरोध प्रदर्शन AISA सहित कई छात्र संगठनों द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था। छात्र संगठन चुनाव आयोग (ECI) द्वारा लागू की जा रही ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया का तीखा विरोध कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के नाम पर कई वैध नागरिकों और छात्रों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं, जिससे उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हो रहा है।
👉प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें
- CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा: छात्र नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से ज्ञानेश कुमार के तुरंत इस्तीफे की मांग की है।
- SIR प्रक्रिया पर रोक:
प्रदर्शनकारी विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को तुरंत प्रभाव से रद्द करने या इसमें पारदर्शिता लाने की मांग कर रहे हैं। - पारदर्शी मतदाता सूची: छात्र संगठनों का कहना है कि चुनाव आयोग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रक्रिया के नाम पर किसी भी नागरिक को उसके मताधिकार से वंचित न किया जाए।
👉पुलिस की कार्रवाई और तनाव का माहौल
जंतर-मंतर पर एकत्र हुए छात्र लगातार चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। प्रदर्शन के उग्र रूप लेने की आशंका और कानून-व्यवस्था बनाए रखने का हवाला देते हुए दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई की। पुलिस ने परिसर से नेहा बोरा समेत कई अन्य प्रमुख छात्र नेताओं को हिरासत में लेकर बस द्वारा नजदीकी पुलिस स्टेशन भेज दिया।
नेहा बोरा की हिरासत के बाद छात्र संगठनों में आक्रोश और गहरा गया है। संगठनों ने पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए इसे लोकतंत्र पर हमला करार दिया है और जल्द ही आगे के राष्ट्रव्यापी आंदोलन का आह्वान करने की चेतावनी दी है।
