कोरबा । डॉक्टर बनने का सपना लेकर मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ अब रहने की व्यवस्था के लिए भी जूझना पड़ रहा है। कोरबा मेडिकल कॉलेज में विद्यार्थियों की संख्या 600 के पार पहुंच गई है, लेकिन झगरहा स्थित आईटी कोरबा इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में संचालित छात्रावास की क्षमता महज 240 विद्यार्थियों की है। नए सत्र में 125 विद्यार्थियों के प्रवेश के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है। जगह की कमी के चलते विद्यार्थियों को कमरों में समायोजित करने के साथ छात्रावास के बड़े हॉल में बिस्तर लगाकर अस्थायी व्यवस्था करनी पड़ रही है।

गौरतलब है कि मेडिकल की पढ़ाई के लिए दूसरे स्थानों से आने वाले विद्यार्थियों को प्रवेश के साथ बुनियादी आवासीय सुविधा मिलने की उम्मीद रहती है। लेकिन कोरबा मेडिकल कॉलेज का संचालन मौजूदा वक्त में झगरहा स्थित आईटी कोरबा इंजीनियरिंग कॉलेज के भवन में किया जा रहा है। इसी परिसर में कक्षाओं के साथ छात्रावास की व्यवस्था भी है। कॉलेज में विभिन्न सेमेस्टर के विद्यार्थियों की कुल संख्या 600 से अधिक हो चुकी है, जबकि छात्रावास में केवल 240 विद्यार्थियों के रहने की क्षमता है। नए सत्र में 125 विद्यार्थियों के प्रवेश के बाद आवास की समस्या ने गंभीर रूप ले लिया। जगह कम पड़ने पर प्रबंधन को उपलब्ध कमरों में विद्यार्थियों को समायोजित करना पड़ा। वहीं, कुछ नए विद्यार्थियों के रहने के लिए छात्रावास के बड़े हॉल में बिस्तर लगाने पड़े हैं। इस अस्थायी व्यवस्था से विद्यार्थियों को फिलहाल गुजारा करना पड़ रहा है।
छात्रावास में जगह की कमी अचानक पैदा हुई समस्या नहीं है। कॉलेज में पहले से ही बड़ी संख्या में विद्यार्थी अध्ययनरत हैं और नए सत्र में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या भी निर्धारित थी। ऐसे में अतिरिक्त आवास की जरूरत का अनुमान लगाया जा सकता था। पूर्व में भी इस संबंध में डीन से सवाल किया जा चुका है। उस समय नए विद्यार्थियों के लिए छात्रावास की व्यवस्था तलाशने की बात कही गई थी। इसके बावजूद प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी स्थायी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं बन सकी। अब विद्यार्थियों को उपलब्ध कमरों और हॉल में की गई अस्थायी व्यवस्था के सहारे रहना पड़ रहा है। विद्यार्थियों में इस स्थिति को लेकर नाराजगी बताई जा रही है। हालांकि, भविष्य में इसी कॉलेज में पढ़ाई जारी रखनी होने के कारण वे खुलकर अपनी परेशानी जाहिर करने से बच रहे हैं।
👉325 करोड़ का नया भवन अब तक तैयार नहीं
कोरबा के भुलसीडीह में मेडिकल कॉलेज के स्थायी परिसर का निर्माण कराया जा रहा है। इसके लिए 124.24 एकड़ जमीन आवंटित की गई है और भवन निर्माण के लिए 325 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। बताया जा रहा है कि नए भवन को जनवरी 2027 तक प्रबंधन को सौंपे जाने की संभावना है। भवन हस्तांतरित होने के बाद विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक और आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की उम्मीद है। लेकिन तब तक पुराने परिसर में सीमित संसाधनों के बीच ही व्यवस्था चलानी होगी। मेडिकल कॉलेज के पास अपना भवन नहीं होने के कारण आईटी कोरबा इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में संचालन किया जा रहा है। इसके लिए कॉलेज प्रबंधन हर महीने 14 लाख रुपये किराया दे रहा है।
यानी स्थायी भवन के अभाव में हर माह बड़ी राशि खर्च हो रही है, लेकिन विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त आवास की समस्या अब भी बनी हुई है। यह स्थिति कई सवाल खड़े करती है। एक ओर जवाबदार अधिकारियों की उदासीनता और भवन निर्माण के निविदा में देरी के कारण स्थायी परिसर के निर्माण में देरी हो रही है, दूसरी ओर मौजूदा व्यवस्था में विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या के अनुरूप छात्रावास की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि नए परिसर के तैयार होने तक विद्यार्थियों को बेहतर आवासीय सुविधा देने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं ? मेडिकल कॉलेज के छात्रावास अधीक्षक डॉ. सत्यप्रकाश यादव के मुताबिक, डीन के निर्देश पर नए विद्यार्थियों के लिए व्यवस्था बनाने का प्रयास किया जा रहा है। आईटी कोरबा परिसर के खाली कमरों में कुछ विद्यार्थियों को समायोजित किया गया है, जबकि अन्य विद्यार्थियों के लिए छात्रावास के बड़े हॉल में अस्थायी व्यवस्था की गई है।
उन्होंने बताया कि नए परिसर का भवन जल्द हस्तांतरित होने की उम्मीद है और इसके बाद विद्यार्थियों को वहां स्थानांतरित करने की योजना है। फिलहाल उपलब्ध संसाधनों के अनुसार सभी विद्यार्थियों के रहने की व्यवस्था बनाने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि डॉक्टर तैयार करने वाले संस्थान में विद्यार्थियों को रहने के लिए पर्याप्त जगह भी क्यों नहीं मिल पा रही है? नए भवन का इंतजार अपनी जगह है, मगर तब तक मौजूदा छात्रावास में क्षमता से अधिक विद्यार्थियों के लिए सम्मानजनक और व्यवस्थित आवास सुनिश्चित करना कॉलेज प्रबंधन की बड़ी चुनौती है।
सोर्स – dw hindi.com
