रायपुर । छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद खत्म होने की घोषणा के बाद अब नेताओं और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य सरकार करीब 400 नेताओं और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा में तैनात 1550 जवानों को हटाने की तैयारी कर रही है। इस फैसले से सरकार को हर साल करीब 150 करोड़ रुपए की बचत होने का अनुमान है।
👉विजय शर्मा बोले- सुरक्षा घटाने का फैसला हो चुका

गृह मंत्री और डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने बताया कि नेताओं की सुरक्षा कम करने का फैसला हो चुका है। इस संबंध में अंतिम सूचना जारी होना बाकी है। सरकार का मानना है कि नक्सलवाद का खतरा खत्म होने के बाद सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करना जरूरी है।
👉विजय शर्मा बोले- सुरक्षा घटाने का फैसला हो चुका
डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा कि नेताओं और जनप्रतिनिधियों को दी गई सुरक्षा की समीक्षा की जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव का निर्णय लिया जा चुका है। अब औपचारिक सूचना जारी होने का इंतजार है। इसके बाद जरूरत के मुताबिक सुरक्षा में तैनात जवानों को दूसरी जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं।
👉बैज ने कहा- सुरक्षा हटाने में जल्दबाजी न करें
वहीं, कांग्रेस नेता दीपक बैज ने सुरक्षा व्यवस्था में कटौती को लेकर जल्दबाजी नहीं करने की बात कही है। उनका कहना है कि नेताओं और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा का फैसला परिस्थितियों और खतरे का आकलन करने के बाद ही लिया जाना चाहिए।
👉हर साल 150 करोड़ रुपए की होगी बचत
प्रस्तावित बदलाव के तहत करीब 400 नेताओं और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा में तैनात 1550 जवानों को हटाया जा सकता है। इससे सरकारी खजाने पर पड़ने वाला खर्च कम होगा और हर साल करीब 150 करोड़ रुपए की बचत होने का अनुमान है। सुरक्षा में तैनात जवानों का इस्तेमाल पुलिस व्यवस्था की दूसरी जरूरतों को पूरा करने में किया जा सकेगा।
