0 कारण बताओ नोटिस और निलंबन की कार्रवाई को बताया अनुचित,देखें VIDEO …
मुंगेली। अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चल रहे राजस्व पटवारियों और प्रशासन के बीच टकराव अब गंभीर मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। राजस्व पटवारी संघ छत्तीसगढ़ मुंगेली के जिलाध्यक्ष के. किशन महिलांग ने निलंबन की कार्रवाई से आहत होकर कलेक्टर के समक्ष इच्छामृत्यु की अनुमति देने की मांग रखी है। उन्होंने इस संबंध में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया है कि उनके खिलाफ झूठे आरोपों के आधार पर कार्रवाई की गई है, जिससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है।

पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष की इस मांग ने जिले में चल रहे पटवारी आंदोलन और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। हालांकि, ज्ञापन में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इस संबंध में संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।
👉हड़ताल के बीच निलंबन की कार्रवाई से बढ़ा विवाद..
ज्ञापन के अनुसार, राजस्व पटवारी संघ छत्तीसगढ़ अपनी विभिन्न लंबित मांगों और समस्याओं के निराकरण के लिए 13 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है। प्रांतीय संगठन के निर्देश पर मुंगेली जिले के पटवारी भी आंदोलन में शामिल हैं। संघ का कहना है कि लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर वे शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।
इसी बीच अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), मुंगेली द्वारा 4 नवंबर 2026 को जारी आदेश के तहत जिला पटवारी संघ अध्यक्ष के. किशन महिलांग और अन्य तहसील अध्यक्षों को निलंबित कर दिया गया। इसके साथ ही जिले के सभी पटवारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने की बात भी ज्ञापन में कही गई है।
संघ के जिलाध्यक्ष का आरोप है कि यह कार्रवाई झूठे आरोपों के आधार पर की गई है। उनका कहना है कि निलंबन से न केवल उनकी नौकरी प्रभावित हुई है, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी उन्हें अपमान और मानहानि का सामना करना पड़ रहा है।
👉सामाजिक प्रतिष्ठा को पहुंची ठेस..


कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में के. किशन महिलांग ने कहा है कि निलंबन की कार्रवाई से उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल हुई है। उनके अनुसार, समाज और परिचितों के बीच उनकी छवि प्रभावित हुई है। उन्होंने इस कार्रवाई से स्वयं के साथ-साथ जिले के अन्य पटवारियों के भी आहत होने की बात कही है।
ज्ञापन में उन्होंने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कलेक्टर से इच्छामृत्यु की अनुमति प्रदान करने का अनुरोध किया है। यह मांग ऐसे समय सामने आई है, जब जिले के पटवारी अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं और प्रशासन की ओर से अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है।
👉कारण बताओ नोटिस का जवाब नहीं देने पर कार्रवाई..
प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पटवारियों को जारी कारण बताओ नोटिस का जवाब नहीं देने के बाद निलंबन की कार्रवाई की गई है। हालांकि, पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष ने इस कार्रवाई को अनुचित बताते हुए आरोप लगाया है कि उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाए गए हैं।
ऐसे में पूरे मामले में प्रशासन का पक्ष भी महत्वपूर्ण हो गया है। यह स्पष्ट होना बाकी है कि निलंबन आदेश में किन आधारों का उल्लेख किया गया है और संबंधित पटवारियों की ओर से नोटिस का जवाब नहीं देने के पीछे क्या कारण रहे।
👉आंदोलन और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच बढ़ा तनाव..
मुंगेली जिले में पटवारियों की हड़ताल से राजस्व संबंधी कार्यों पर असर पड़ने की आशंका के बीच निलंबन की कार्रवाई ने विवाद को और गहरा कर दिया है। एक ओर संघ अपनी मांगों के निराकरण की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक अनुशासन को लेकर कार्रवाई की जा रही है।
👉देखें वीडियो..
जिलाध्यक्ष द्वारा इच्छामृत्यु की अनुमति मांगने का कदम इस विवाद की गंभीरता को दर्शाता है। अब इस मामले में कलेक्टर और संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी। साथ ही यह भी देखना होगा कि प्रशासन और पटवारी संघ के बीच बातचीत के जरिए कोई समाधान निकल पाता है या नहीं।
फिलहाल, इच्छामृत्यु की मांग को लेकर सौंपे गए ज्ञापन और निलंबन की कार्रवाई पर प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

