नई दिल्ली. न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल और उसके बाद इंग्लैंड दौरे (India Tour of England) के लिए जिस टेस्ट टीम का चयन हुआ उसमें सबसे शानदार बात क्या है? शायद ही किसी का ध्यान उस पर गया हो. आमतौर पर हार्दिक पंड्या का ना होना और कुछ खिलाड़ियों की फिटनेस समस्या ही सुर्खियों में आयी है लेकिन इस टीम में 5 ऐसे तेज़ गेंदबाज़ों का एक साथ होना भारतीय टेस्ट इतिहास की सबसे सुखद खबर है.
इशांत शर्मा, मोहम्मद शमी, उमेश यादव, जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद सिराज. ये वो 5 तेज गेंदबाज़ हैं जिन पर भारतीय क्रिकेट इतिहास को नाज़ होगा अगर ये फिट रहें और टीम इंडिया पहली टेस्ट चैंपियनशिप जीतने में कामयाब हो और साथ-साथ ही इंग्लैंड में 15 साल बाद एक टेस्ट सीरीज़ में जीत हासिल करे.
यूं तो पूरे आक्रमण(स्पिन गेंदबाज़ों के विकेट जोड़कर) के अनुभव को जोड़ा जाय तो करीब 1400 विकेट हैं लेकिन इंग्लैंड में टीम इंडिया की असली ताकत यही ‘पंजा’ होगा. भुवनेश्वर कुमार अनफिट होने के चलते इस टीम का हिस्सा नहीं है वर्ना तेज़ गेंदबाज़ों की फौज के तौर पर किसी टेस्ट टीम में शायद वेस्टइंडीज़ के दबदबे के बाद एक साथ किसी एक टीम में इतने काबिल तेज़ गेंदबाज़ शायद ही साथ दिखें हों.
भारतीय तेज गेंदबाजी में गजब का पैनापन
ईशांत ने अगर कपिल देव और ज़हीर ख़ान के बाद सबसे ज़्यादा टेस्ट विकेट हासिल कियें हैं तो शमी की तरह स्विंग गेंदबाज़ी का जलवा नई और पुरानी गेंद से दिखाने में दुनिया के कुछ ही गेंदबाज़ उनके सामने ठहरेंगे. उमेश को हमेशा की तरह छुपा रुस्तम ही माना जायेगा जबकि उनकी रफ्तार और बेहद विपरीत हालात में विकेट लेने की काबिलियत उन्हें एक बेहद अहम हथियार बनाती है. बुमराह तो बुमराह हैं और उन पर शब्द खर्च करने की ज़रुरत नहीं है. बची-खुची जो भी बातें या सवाल सिराज के चयन पर पहले हो सकती थी तो उन्होंने पिछले साल ऑस्ट्रेलिया दौरे पर सबसे कामयाब गेंदबाज़ बनकर ये दिखा दिया था कि वो लंबी रेस के घोड़े हैं. सिराज ही इस मौजूदा विरासत को आने ले जाने वालों में सबसे आगे दिखेंगे. सिराज की ही तरह शार्दुल ठाकुर ने भी पिछले दौरे पर हर किसी को भौंचक्का किया था और अगर एक बार फिर से इंग्लैंड में वो वैसा ही खेल दिखा पाते हैं तो शायद वो भी इस पंजे के साथ लंबे समय तक खेल सकते हैं.अरजन नगवसवाला भी टीम के साथ जाएंगे इंग्लैंड
इन तेज़ गेंदबाज़ों का साथ देने के लिए 20 सदस्यीय दल में अरजन नगवसवाला भी हैं. हालांकि, इस बात के बहुत मायने नहीं है लेकिन एक दिलचस्प बात है कि 28 साल बाद भारतीय टीम में किसी पारसी खिलाड़ी की वापसी हुई है. आखिरी बार, फारुख़ इंजीनियर टीम इंडिया के लिए एक पारसी खिलाड़ी थे. अगर अरजन के बारे में आप नहीं जानते हैं तो इसका मतलब ये है कि आप घरेलू क्रिकेट की अनदेखी करते हैं. 2019-20 रणजी सीजन में गुजरात के इस गेंदबाज ने अपने राज्य के लिए सबसे ज्यादा 41 विकेट 19 से भी कम की औसत( 18.36) से लिए थे. उनका खेलना तो मुश्किल दिखता है लेकिन पिछले ऑस्ट्रेलिया दौरे पर हर किसी ने सिराज के बारे में भी शायद यही तो सोचा था. लेकिन, आज सिराज कहां हैं. तो तैयार रहियेगा अगर अरजन भी वैसे ही हर किसी को चौंकाने में कामयाब हों. अरजन के साथ साथ रिजर्व खिलाडियों के तौर पर आवेश खान और प्रसिद्ध कृष्णा को भी इस दौरे पर काफी कुछ सीखने को मिलेगा और मुमकिन है कि अगर उन्हें किसी तरह से मौका मिला तो वो भी किसी को मायूस नहीं करेंगे. अब तक फर्स्ट क्लास क्रिकेट और आईपीएल में अपने खेल से इन दोनों ने भी भविष्य के लिए उम्मीदें जगाई हैं.
शुभमन गिल पर भरोसा करना कितना सही?
बहराहल, कुछ बातें निश्चित तौर पर क्रिकेट के चाहने वालों को खटकेंगी क्योंकि चेतन शर्मा की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने की ऐसे फैसले लिए हैं जिस पर हर किसी की अलग राय हो. मसलन,ओपनर के तौर पर शुभमन गिल और मयंक अग्रवाल की जोड़ी पर भरोसा दिखाना सही दिखता है लेकिन जिस गिल को भारतीय पिचों पर 7 पारी के दौरान 5 मौकों पर एंडरसन, स्टोन और आर्चर ने चलता किया और जो आईपीएल में भी संघर्ष करता दिख रहा था, वो क्या कामयाबी की गारंटी बन सकता है? ठीक उसी तरह से पृथ्वी शॉ को रिजर्व ओपनर के तौर पर भी टीम में नहीं रखना कितना सही फैसला होगा ?
