एजेंसी । मिडिल ईस्ट की सियासत में एक ऐसा मोड़ आ गया है जिसने पूरी दुनिया की धड़कनें बढ़ा दी हैं. एक तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी सख्त धमकियों से ईरान को झुकाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ तेहरान ने कुछ ऐसा कर दिया है जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी.
डेडलाइन खत्म होने से पहले ही ईरान ने बातचीत के सारे दरवाजे बंद कर दिए हैं. इस पूरे तनाव के बीच पड़ोसी देश पाकिस्तान बुरी तरह फंस गया है, जो दोनों देशों के बीच सुलह कराने की नाकाम कोशिश कर रहा था. जिस पीस टॉक की वेंस को उम्मीद थी, वो कचरे के डिब्बे में जाती दिख रही है.
👉डेडलाइन खत्म होने से पहले ईरान का कड़ा फैसला

ईरान ने अब साफ कर दिया है कि वो अमेरिका के साथ किसी भी तरह के संवाद के पक्ष में नहीं है. ‘तेहरान टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने अमेरिका के साथ चल रहे सभी डिप्लोमैटिक और इनडायरेक्ट कम्युनिकेशन चैनल्स को पूरी तरह बंद कर दिया है. संदेशों के आदान-प्रदान को भी फिलहाल सस्पेंड कर दिया गया है. ट्रंप की ‘मैक्सिमम प्रेशर’ वाली रणनीति के जवाब में ईरान ने ‘नो टॉक्स’ की दीवार खड़ी कर दी है, जिससे तनाव अब सातवें आसमान पर पहुंच गया है.
डिप्लोमैटिक चैनल्स बंद करने का मतलब है कि अब सुलह की गुंजाइश खत्म हो चुकी है. जब बातचीत के दरवाजे बंद होते हैं, तो अक्सर टकराव के रास्ते खुल जाते हैं. ईरान का यह कदम सीधे तौर पर ट्रंप की विदेश नीति को एक खुली चुनौती है, जिससे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात पैदा हो सकते हैं.
👉पाकिस्तान की बढ़ी बेचैनी
इस पूरे अंतरराष्ट्रीय ड्रामे में पाकिस्तान की हालत सबसे खराब हालत पाकिस्तान की है. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तानी सूत्र अभी भी दावा कर रहे हैं कि वे पर्दे के पीछे से अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत सुलझाने की कोशिशों में जुटे हैं. पाकिस्तान लंबे समय से दोनों देशों के बीच एक बिचौलिए की भूमिका निभाने का सपना देख रहा था लेकिन ईरान के इस ताजा और सख्त फैसले ने पाकिस्तान की सारी कूटनीतिक मेहनत पर पानी फेर दिया है. अब इस्लामाबाद के लिए ये तय करना मुश्किल हो रहा है कि वह अपने पड़ोसी ईरान का साथ दे या अमेरिकी नाराजगी से बचे.
