कोरबा। कभी कटघोरा तो कभी पाली वन मंडल में अपने कारनामों और घोटालों से चर्चा में रहने वाले एवं विभागीय के साथ-साथ राजनीतिक वरदहस्त प्राप्त वर्तमान कोरबा रेंजर मृत्युंजय शर्मा तालाब के साथ ही अब वॉच टावर में भी खेल रहे हैं। इनके देखरेख में वॉच टावर का न सिर्फ घटिया निर्माण हो रहा है बल्कि लगभग 2 साल से निर्माण अधूरा ही है और काम करने वाले मजदूर की जान आफत में।
हम बात कर रहे हैं कोरबा वन मंडल के ग्राम भुलसीडीह में जांच नाका के पास आधा-अधूरा निर्मित और रिकॉर्ड में पूर्ण निर्मित तथा अधूरे निर्माण में भी पूर्ण रूप से राशि आहरण वाले वॉच टावर के कार्य का।
👉 कैम्पा मद का है कार्य,जानें विवरण

विभागीय सूत्र ने बताया कि कैम्पा मद के 20 लाख रुपए की लागत से यह निर्माण कार्य भी रेंजर के द्वारा कराया जाना वर्ष 2022-23 में स्वीकृत किया गया जिसकी कार्य पूर्णता अवधि मार्च 2025 थी। उक्त निर्माण कार्य आज पर्यंत अधूरा है जबकि 1 साल से अधिक समय बीत चुका है।
हाथी प्रभावित क्षेत्रों में हाथियों की निगरानी और उन पर नजर रखने के लिए इस तरह के टावर का निर्माण वन विभाग के द्वारा कराया जा रहा है। निर्माण कार्य का जो ढांचा मौके पर खड़ा नजर आता है उसमें व्यापक पैमाने पर भ्रष्टाचार उजागर रहा है। विभागीय निर्माण जानकार के मुताबिक तीन मंजिला वॉच टावर के निर्माण का यह मापदंड नहीं है। इसमें कम से कम 16 और अधिकतम 20 एमएम मोटाई वाला का रॉड इस्तेमाल किया जाना जरूरी होता है ताकि वह मजबूती से टिका रहे। लेकिन, जो कार्य कराया गया है उसमे मात्र 10 एमएम का रॉड और कहीं-कहीं 8 एमएम का भी रॉड नजर आ रहा है।

यह निर्माण पूर्ण रूप से गुणवत्ताहीन और घटिया कहें तो गलत नहीं होगा। इसके अलावा कॉलम,सीढ़ी का निर्माण भी गुणवत्ताहीन तरीके से कराया गया है।
नींव तक में गफलत वाले इस कार्य को लेकर अब इसमें मरम्मत व पोताई की लीपापोती चल रही है। आलम यह है कि दरारें भी आना शुरू हो गई हैं।
👉 20 फीट से गिरा मजदूर
इस निर्माण कार्य के दौरान 26 फरवरी 2026 को एक हादसा भी हुआ जिसमें निर्मित हो चुकी बेसहारा गुणवत्ताहीन सीढ़ी के टूट जाने से करीब 20 फीट ऊंचाई से गिरकर एक मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गया था।
👉 डीएफओ-एसडीओ की अनदेखी

रेंजर की देखरेख में कराए जा रहे इस कार्य की गुणवत्ता को लेकर तथा कार्य की निगरानी के संबंध में जिम्मेदारी एसडीओ और उनसे ऊपर डीएफओ की होती है लेकिन उनके द्वारा मापदंड को ताक पर रखकर रेंजर द्वारा कराए जा रहे सभी कार्यों को ओके बता कर समस्त भुगतान भी सुनिश्चित कर दिया जाता है।
👉 लेप्स होने से पहले राशि आहरण..!
सूत्र बताते हैं कि वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले कार्यों की राशि लेप्स ना हो जाए, इसके लिए वर्ष समाप्त होने से पहले ही कार्य पूर्ण बताकर राशि आहरण कर लिया जाता है। उक्त वॉच टॉवर के निर्माण के मामले में भी यह राशि आहरित कर ली गई है वरना वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर राशि लैस हो जाती।
👉 रेंजर की यह सफाई
इस मामले में रेंजर मृत्युंजय शर्मा का कहना है कि कार्य पूर्ण कराया जा रहा है और अभी इस कार्य की राशि पूर्ण रूप से आहरित नहीं हुई है। कार्य की गुणवत्ताहीनता से उन्होंने इनकार करते हुए कहा कि पूरा कार्य गुणवत्ता के आधार पर हो रहा है। हादसे के बारे में कहा कि प्रारंभिक तौर पर जो उनका दायित्व था,उसे उन्होंने पूरा किया है।
सोर्स – सत्यसंवाद डॉट कॉम
