नई दिल्ली । भारतीय अरबपति अनिल अग्रवाल की वेदांता ने 11 जुलाई को एनर्जी से जुड़ा एक बड़ा ऐलान किया है। वेदांता ने हर रोज 5,00,000 बैरल ऑयल इक्विवेलेंट तेल और गैस का उत्पादन करने के अपने लक्ष्य को फिर से दोहराया। वेदांता के अनुसार इससे भारत की एनर्जी सिक्योरिटी की दिशा में कंपनी की भूमिका बहुत अहम हो जाएगी।

भारत अभी अपनी तेल और गैस की जरूरतों का लगभग 90त्न हिस्सा आयात करता है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था ग्लोबल सप्लाई में रुकावट और कीमतों में उतार-चढ़ाव के जोखिम के दायरे में रहती है। वेदांता ने बताया कि देश में लगभग 300 अरब बैरल के बराबर हाइड्रोकार्बन संसाधन मौजूद हैं।कंपनी ने कहा है कि वेदांता ऑयल एंड गैस – केयर्न एडवांस्ड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके तेजी से खोज और बेहतर ऑयल रिकवरी के जरिए इस बड़े रिसोर्स बेस का फायदा उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।
गौरतलब है कि वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा है कि भारत के लिए ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर होना एक रणनीतिक आर्थिक जरूरत है। देश में उत्पादित तेल और गैस का हर बैरल हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है, आयात पर निर्भरता कम करता है और देश की मजबूती बढ़ाता है। भारत के पास भरपूर प्राकृतिक संसाधन, विश्व-स्तरीय तकनीकी प्रतिभा और उद्यमिता की क्षमता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भारत में हाइड्रोकार्बन के लिए अभी भी काफी कम खोज हुई है।
माना जाता है कि कई बड़े संभावित सेडिमेंट्री बेसिन की सही ढंग से अभी खोज की जानी बाकी है, जिससे खोज और घरेलू उत्पादन बढ़ाने की काफी गुंजाइश दिखती है। भारत ने नेशनल डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन मिशन (समुद्र मंथन) के तहत गहरे और बहुत गहरे पानी वाले ब्लॉक में बड़े नो-गो (प्रतिबंधित) क्षेत्रों को खोल दिया है और इस दशक के अंत तक अपने ऊर्जा क्षेत्र में 500 अरब डॉलर के निवेश के अवसर पैदा किए हैं।
वेदांता का कहना है कि लंबे समय तक ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए इंडस्ट्री, उद्यमियों और टेक्नोलॉजी इनोवेटर्स के बीच लगातार सहयोग की जरूरत होगी।
वेदांता ऑयल एंड गैस के पास राजस्थान, गुजरात, असम और आंध्र प्रदेश में लगभग 47,000 वर्ग किलोमीटर में फैले 44 ऑनशोर और ऑफशोर ब्लॉक हैं, जिनमें पारंपरिक और गैर-पारंपरिक दोनों तरह के हाइड्रोकार्बन संसाधन शामिल हैं।
