दिल्ली में धरना प्रदर्शन के बाद चुनाव आयोग का पलटवार ,प्रेस रिलीज कर कही यह बड़ी बात ,राहुल के दावों को किया खारिज …

दिल्ली । भारत निर्वाचन आयोग और विपक्षी दलों के बीच टकराव मंगलवार को दिल्ली में दिनभर चले धरना-प्रदर्शन के बाद और बढ़ गया। चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन, राहुल गांधी समेत विपक्षी सांसदों की हिरासत और आयोग से मुलाकात की मांग को लेकर चल रही सियासी बहस के बीच भारत निर्वाचन आयोग ने रात करीब 9:35 बजे अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल ‘X’ पर प्रेस नोट जारी कर विपक्ष के दावे पर सवाल खड़ा कर दिया। आयोग ने स्पष्ट किया कि शाम 4 बजे तक किसी भी राजनीतिक दल की ओर से अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से बैठक के लिए समय नहीं मांगा गया था। भारत निर्वाचन आयोग यह बयान ऐसे समय आया है, जब दिनभर विपक्षी सांसदों की ओर से यह कहा जाता रहा कि वे चुनाव आयोग से मिलना चाहते हैं, लेकिन उन्हें मिलने का समय नहीं दिया जा रहा है।

Election Commission of India Press Note

Date 🗓️ — 6 October 2026

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— Election Commission of India (@ECISVEEP) October 6, 2026

गौरतलब है कि मंगलवार को देश की राजधानी दिल्ली में दिनभर चले घटनाक्रम में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किया। पुलिस द्वारा प्रदर्शन समाप्त करने की अपील के दौरान भी विपक्ष की ओर से आयोग से मुलाकात और ज्ञापन सौंपने की बात कही गई। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक राहुल गांधी ने चुनाव आयुक्तों से मिलने की मांग को लेकर सवाल उठाया और कहा कि विपक्षी सांसद चुनाव आयोग के सामने अपनी बात रखना चाहते हैं। प्रदर्शन के दौरान कई विपक्षी सांसदों को पुलिस ने हिरासत में भी लिया। लेकिन अब आयोग की ओर से जारी प्रेस नोट में बैठक के लिए औपचारिक प्रक्रिया और समय मांगने के तरीके को लेकर अलग तस्वीर पेश की गई है।

👉ECI बोला- 2025 में तय की गई थी प्रक्रिया

चुनाव आयोग ने प्रेस रिलीज जारी कर स्पष्ट किया कि वर्ष 2025 में राजनीतिक दलों के साथ बैठक के लिए एक प्रक्रिया निर्धारित की गई थी। इसके तहत किसी राजनीतिक दल या कई दलों के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल को आयोग से मिलने के लिए अपने अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से समय मांगना होता है। आयोग के मुताबिक इसके बाद दोनों पक्षों की सहमति से बैठक का समय तय किया जाता है। यानी आयोग का मुख्य तर्क यह है कि सांसदों का मौके पर पहुंचना और बैठक की मांग करना औपचारिक रूप से पहले से मांगे गए समय के बराबर नहीं माना जा सकता। प्रेस नोट में चुनाव आयोग ने एक और महत्वपूर्ण बात कही है। आयोग के मुताबिक शाम 4 बजे के बाद जब वह सांसदों के मुलाकात के प्रस्ताव पर विचार कर रहा था।

तब दिल्ली पुलिस के DCP ने बताया कि प्रस्तावित बैठक 240 सांसदों के समूह के साथ संसद भवन के ‘Annexe’ में होनी थी। आयोग ने इसे असामान्य अनुरोध बताते हुए कहा कि प्रोटोकॉल के अनुसार ऐसी मुलाकात निर्वाचन आयोग के परिसर में ही होती है। आयोग ने यह भी कहा कि उसने सांसदों का ज्ञापन लेने के लिए अपने सबसे वरिष्ठ कार्यरत अधिकारी को बैठक स्थल पर भेजने का प्रस्ताव दिया था। प्रेस नोट के मुताबिक, यह अपने आप में एक असाधारण कदम होता, लेकिन आयोग का दावा है कि इस प्रस्ताव को भी सांसदों ने स्वीकार नहीं किया।

👉अब आमने-सामने हैं दोनों पक्षों के दावे

पूरे विवाद का सबसे अहम पहलू यही है कि विपक्ष का कहना है कि वह चुनाव आयोग से मिलना चाहता था और उसे समय नहीं दिया गया, जबकि आयोग अब कह रहा है कि शाम 4 बजे तक किसी राजनीतिक दल की ओर से औपचारिक रूप से बैठक के लिए समय ही नहीं मांगा गया था। यही विरोधाभास मंगलवार के पूरे राजनीतिक घटनाक्रम को और ज्यादा तूल दे रहा है।विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं, जबकि आयोग अपनी निर्धारित प्रक्रिया और प्रोटोकॉल का हवाला दे रहा है। मंगलवार को प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की खबर भी सामने आई।

👉’प्रोटोकॉल बनाम राजनीतिक दबाव’ बना बड़ा सवाल

ECI ने अपने बयान के अंत में कहा कि कोई भी राजनीतिक दल किसी भी समय आयोग से मिलने का अनुरोध कर सकता है और आयोग उपलब्धता के अनुसार बैठक की तारीख और समय तय कर सकता है। ऐसे में अब राजनीतिक विवाद का केंद्र सिर्फ ‘चुनाव आयोग से मुलाकात क्यों नहीं हुई?’ नहीं रह गया है, बल्कि सवाल यह भी बन गया है कि क्या विपक्ष ने आयोग से मिलने के लिए तय प्रक्रिया के तहत औपचारिक समय मांगा था या नहीं ? दूसरी ओर, विपक्ष के लिए यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वह चुनाव आयोग के सामने अपने आरोप और आपत्तियां सीधे रखने की मांग कर रहा है। ऐसे में देर रात जारी ECI का यह प्रेस नोट दिल्ली के दिनभर चले राजनीतिक टकराव में एक नया मोड़ माना जा रहा है।