0 सेनेटरी पैड देने में गड़बड़ी, फीस के नाम पर 500 रुपये अधिक वसूलने, दुर्व्यवहार की शिकायतों की जांच में हुई पुष्टि
बिलासपुर । छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का माहौल सुधारने और छात्राओं को सुरक्षित वातावरण देने के दावों के बीच बिलासपुर जिले के मल्हार स्थित सरकारी स्कूल से गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। छात्राओं को सेनेटरी पैड देने में गड़बड़ी, विद्यार्थियों से कथित तौर पर फीस के नाम पर 500 रुपये अधिक वसूलने और उनके साथ दुर्व्यवहार की शिकायतें जांच में सही पाई गई हैं। इतना ही नहीं, जांच में यह भी सामने आया कि एक शिक्षिका स्कूल के चपरासी से उत्तर पुस्तिकाओं की जांच कराने का काम लेती थीं। मामले में कलेक्टर की मंजूरी के बाद जिला शिक्षा अधिकारीने प्राचार्य समेत तीन शिक्षकों को दूसरी जगह पदस्थ करने के साथ ही कार्रवाई के लिए DPI को प्रस्ताव भेजा है।

गौरतलब है कि मल्हार के सरकारी स्कूल में खराब व्यवस्था, विद्यार्थियों के साथ दुर्व्यवहार और निर्धारित राशि से अधिक पैसे वसूलने की शिकायतें लंबे समय से सामने आ रही थीं। मामला मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तक भी पहुंचा था। इसके बावजूद स्थिति में सुधार नहीं होने पर छात्राओं ने 1 अक्टूबर को सीधे कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर जमकर विरोध प्रदर्शन किया था। छात्राओं के इस प्रदर्शन की जानकारी के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया था। छात्राओं ने प्राचार्य वेदप्रकाश शुक्ला, व्याख्याता रश्मि गुप्ता और संजय दुबे के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद कलेक्टर के निर्देश पर डीईओ ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की। टीम ने 7 अक्टूबर को अपनी रिपोर्ट सौंप दी, जिसमें शिकायतों की पुष्टि होने की बात सामने आई।
👉चपरासी से उत्तर पुस्तिकाएं जांचने का काम कराने की पुष्टि
जांच रिपोर्ट में व्याख्याता रश्मि गुप्ता के खिलाफ विद्यार्थियों से दुर्व्यवहार करने, उत्तर पुस्तिकाओं की जांच और पढ़ाने से जुड़ा काम चपरासी से कराने की शिकायतें सही पाई गईं। व्याख्याता संजय दुबे के खिलाफ भी विद्यार्थियों से दुर्व्यवहार और अन्य अनियमितताओं की पुष्टि होने की जानकारी सामने आई है। जांच में हुए इस सनसनीखेज खुलासे के बाद सबसे बड़ा सवाल शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर है। क्या स्कूल में कक्षाओं के संचालन, शिक्षकों की जिम्मेदारी और विद्यार्थियों के मूल्यांकन की नियमित समीक्षा की जा रही थी ? अगर निरीक्षण होते थे, तो इन गड़बड़ियों का पता पहले क्यों नहीं चला ? जांच में हुए इस खुलासे के बाद स्कूल के प्राचार्य समेत 3 शिक्षकों को हटा दिया गया है। जांच रिपोर्ट के बाद कलेक्टर की मंजूरी से डीईओ ने 9 अक्टूबर को तीनों शिक्षकों की नई पदस्थापना के आदेश जारी किए।
जारी आदेश में स्कूल के प्राचार्य वेदप्रकाश शुक्ला को शासकीय हाई स्कूल कुकुर्दीकेरा, विकासखंड मस्तूरी, व्याख्याता रश्मि गुप्ता को शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पचपेड़ी और व्याख्याता संजय दुबे को शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ओखर में फिलहाल पोस्टिंग दी गयी है। हालांकि ये आदेश राज्य शासन से तबादले की मंजूरी मिलने की प्रक्रिया के अधीन हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक शासन से दूसरी जगह पदस्थ करने का आदेश जारी होने के बाद मौजूदा आदेश स्वतः निरस्त माने जाएंगे। डीईओ संदीप पांडेय ने बताया कि प्राचार्य और दोनों व्याख्याताओं के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) को भेजा गया है। उनके अनुसार, गंभीर अनियमितताओं के मामलों में कार्रवाई करने का अधिकार डीपीआई के पास है।
👉सिर्फ तबादला काफी है या जवाबदेही भी तय होगी

मल्हार के इस मामले में जांच के बाद कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होना एक अहम कदम है, लेकिन इससे सरकारी स्कूलों में व्याप्त अव्यवस्थाओं को लेकर उठे सवाल खत्म नहीं होते। सबसे बड़ा सवाल यह है कि स्कूलों की निगरानी के लिए जिम्मेदार अधिकारी आखिर किस स्तर पर जवाबदेह हैं ? सरकारी स्कूलों में प्राचार्य, शिक्षक, विकासखंड शिक्षा अधिकारी और जिला शिक्षा विभाग की अलग-अलग जिम्मेदारियां होती हैं। नियमित निरीक्षण, विद्यार्थियों की शिकायतों का निपटारा, शैक्षणिक गतिविधियों की समीक्षा और स्कूलों में उपलब्ध सुविधाओं की जांच इसी व्यवस्था का हिस्सा हैं। यदि किसी स्कूल में कथित अनियमितताएं लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो यह जानना भी जरूरी है कि निगरानी के दौरान क्या कार्रवाई की गई और शिकायतों को पहले गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया।
यह मामला सिर्फ तीन शिक्षकों की पदस्थापना बदलने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। सेनेटरी पैड वितरण में गड़बड़ी और कथित अतिरिक्त वसूली की जांच, विद्यार्थियों के साथ व्यवहार की समीक्षा तथा शैक्षणिक जिम्मेदारियों में हुई अनियमितताओं पर नियमानुसार कार्रवाई जरूरी है। साथ ही यह भी जांचा जाना चाहिए कि संबंधित अधिकारियों की निगरानी में कोई चूक हुई या नहीं। आखिर सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर शिक्षा, सुरक्षित माहौल और पारदर्शी व्यवस्था देना किसकी जिम्मेदारी है? जब शिकायतों की पुष्टि जांच में होती है, तब सवाल केवल दोषी पाए गए कर्मचारियों पर कार्रवाई का नहीं, बल्कि उस निगरानी तंत्र की जवाबदेही का भी है, जिसे ऐसी स्थिति पैदा होने से पहले ही सतर्क हो जाना चाहिए था।
