कोल वाशरी के लिए जमीन खरीदने आदिवासियों से छल ,हाईकोर्ट ने 31 लोगों को नोटिस जारी करने दिया आदेश ,मचा हड़कम्प ….

कोल वाशरी के लिए जमीन खरीदने आदिवासियों से छल ,हाईकोर्ट ने 31 लोगों को नोटिस जारी करने दिया आदेश ,मचा हड़कम्प ….

बिलासपुर/कोरबा। जिले के कोयलांचल दीपका क्षेत्र में संचालित एसीबी पावर प्लांट/कोल वाशरी के लिए जमीनों की खरीदी में किए गए फर्जीवाड़ा का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। आदिवासी प्रमाण पत्रों के जरिए 23 गैर आदिवासियों के द्वारा फर्जी तरीके से लगभग 500 एकड़ जमीन की खरीदी वास्तविक आदिवासियों से की गई।फर्जी आदिवासी लोगों के नाम से बिना कोई राजस्व प्रकरण चलाये और बिना रिकार्ड के ही जारी कर दिए गए जाति प्रमाण पत्र के आधार पर फर्जीवाड़ा के इस मामले में उच्च न्यायालय ने दायर याचिका पर कुल 31 लोगों के विरुद्ध नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

इस मामले में न्यायाधीश राकेश मोहन पांडेय की अदालत ने छत्तीसगढ़ शासन, राज्य शासन के सचिव, कोरबा कलेक्टर, अनुविभागीय अधिकारी, जिला स्तरीय प्रमाण पत्र सत्यापन समिति, उच्च स्तरीय प्रमाणन स्कू्रटनी कमेटी, तहसीलदार के अलावा गजेन्द्र सिंह ठाकुर, रघुनाथ बानरा, नन्दूलाल ईश्वर एक्का, रंजीत लकड़ा, जोरमुण्डा, बुधन सिंह, गेवरियल, मोतीराम, सिकुर तुबिद, राजू, हिजकेल कमल, शिवम ओरांव, सिकंदर, विनोद तुडु, पाण्डवहोन, पीताम्बर, सोनाराम, जोगेन्दर, विश्वनाथ, मघुरा व कुंवर मांझी को नोटिस जारी करने का आदेश जारी किया है। मामले को दबाने वालों में खलबली मच गई है।
बताते चलें कि फर्जी आदिवासी बनकर हासिल किए गए जाति प्रमाण पत्र के आधार पर किए गए जमीनों की खरीदी के फर्जीवाड़ा के जरिए भू-स्वामी बनकर हजारों करोड़ रुपए का मुआवजा भी इन लोगों ने हासिल किया है। जिन लोगों के नाम से आदिवासी प्रमाण पत्र जारी किए गए, उस नाम का कोईभी शख्स कभी भी संबंधित ग्राम क्षेत्र में न तो निवास किया और न ही उसके परिजन, सदस्य यहां निवासरत रहे हैं। पूरी तरह से फर्जीवाड़ा का सुनियोजित तानाबाना बुनकर इसे अंजाम दिया गया है। इसी मामले में राजस्व विभाग द्वारा धारा 170 ख के तहत कार्रवाई करते हुए ईश्तहार का प्रकाशन भी कराया जा चुका है और आदिवासियों की धोखे से खरीदी गई जमीन को मूल आदिवासियों के नाम पुन: दर्ज करने की कार्रवाई भी हो रही है। ग्राम दीपका, रतिजा, बांधाखार, नुनेरा ऐसे गांव हैं जहां पर एसीबी कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए दलालों और चन्द राजस्व अधिकारियों की सांठ गांठ से मूल निवासी आदिवासियों के हक पर डाका डाला गया। ग्राम रतिजा के लोग 23 साल बाद भी अपने गांव का मिसल बंदोबस्त, नक्शा, अधिकार अभिलेख प्राप्त करने के लिए प्रयासरत हैं जो कि उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए रहस्यमय तरीके से गायब कर दिया गया है।

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